आज का पन्ना

आज धरती ने फिर एक गहरी साँस ली। कहीं जंगल कम हुए, कहीं नदियाँ सूखीं, और कहीं उम्मीद ने नया रूप लिया।

बीते कल की याद

कभी यही धरती हर मौसम में मुस्कुराती थी। खेतों की हरियाली, खुले आकाश और साफ़ हवाएँ जीवन की पहचान थीं।

“धरती सब कुछ सह लेती है, पर भूलती कुछ नहीं।”

आने वाला कल

आने वाला कल हमारे आज के फैसलों पर निर्भर है। यदि हम समझदारी से चलें, तो धरती की डायरी फिर से खुशियों से भर सकती है।